26 साल और स्कूल की ‘खबरी’ आकृति खत्री बनी देश की सबसे युवा महिला जासूस
Mar 8th, 2014 | By bhopalkataj | Category: दिल्ली, महिलाएँ, रोचक ख़बरें
नई दिल्ली. मार्च का महीना शुरू हो चुका है। इस महीने की आठ तारीख को पूरी दुनिया वुमेंस डे (woman’s day) के तौर पर सेलिब्रेट करती है। इस विशेष अवसर पर और आधी दुनिया के जज्बे को सलाम करने के लिए bhopalkataj.com आपको देश की कुछ ऐसी चुनिंदा महिलाओं से मिलवा रहा है जिन्होंने उस पेशे को अपनाया जिन्हें उनसे पहले सिर्फ पुरुषों से ही जोड़कर देखा जाता था। ऐसा ही एक पेशा है जासूसी यानी डिटेक्टिव का।
“18 साल की एक भोली-भाली लड़की अपनी मां के साथ मेरे ऑफिस में आई। पहले थोड़ा झिझकी, उसकी मां कुछ कहना चाहती थी लेकिन, कह न सकी। आखिर बेटी ने हिम्मत की और मुझे बताना शुरू किया। दरअसल उन्हें शक था कि लड़की के पिता का किसी दूसरी औरत से सम्बंध है। मैंने जांच शुरू की और जो सच सामने आया, उसे जानकार मैं भी हैरान थी। उस व्यक्ति के किसी एक से नहीं बल्कि, तीन औरतों से संबंध थे।” ये तो सिर्फ एक किस्सा है जिसका खुलासा देश की सबसे युवा महिला जासूस आकृति खत्री ने किया। ये अकेला केस नहीं था, जिसे आकृति ने चुटकियों में सॉल्व कर दिया। दरअसल इस सिलसिले की शुरुआत तो कॉलेज में ही हो गई थी।
किसी लड़की के बॉयफ्रेंड के पर्सनल लाइफ से लेकर टीचर के घर में क्या-कुछ चल रहा है, यह सब पता लागाने में आकृति माहिर थी। इसलिए कॉलेज में किसी की जासूसी करने की बात आते ही सबसे पहले आकृति का नाम ही सबके दिमाग में आता था। इसलिए दोस्त उन्हें ‘खबरी’ भी कहते थे।
आज अपनी कंपनी को लीड करती हैं आकृति
आकृति पहली झलक में किसी मल्टी नेशनल कंपनी में काम करने वाली आधुनिक महिला सी दिखती हैं। लेकिन धोखा मत खाइए, हम बात कर रहे हैं दिल्ली की एक ऐसी महिला की, जो छोटी सी उम्र में देश की चुनिंदा डिटेक्टिव एजेंसियों में से एक को लीड करती हैं। अाकृति खत्री, बेवफा पार्टनर्स, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स और वफादरी की जांच करने में माहिर हैं। यह सबकुछ वह बड़े ही प्यार से और ऐसे मोहक जाल बिछा कर करती हैं कि किसी को पता तक ही नहीं चलता कि वह शिकार बन चुका है।
एक ऐड ने बदल दी जिन्दगी की दिशा
दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होने के बाद आकृति ने एमबीए करने की सोची। एमबीए करने के बाद उन्होंने एक प्राइवेट कंपनी में काम शुरू किया। हालांकि, वहां काम करते वक्त आकृति खुश नहीं थी। आकृति बताती हैं कि उन्हें कंपनी में काम करते वक्त दिल से खुशी महसूस नहीं होती थी। एक दिन उन्होंने एक ऐड देखा और अप्लाई कर दिया। इस एक फैसले ने आकृति के जिंदगी की दिशा ही बदल दी। ऐड एक डिटेक्टिव एजेंसी का था। उन्होंने अपने पैरेंट्स से बात की और उन्होंने आकृति को अनुमति दे दी। बस फिर क्या था अपने सपनों को हकीकत में बदलने घर से निकली आकृति आज देश की सबसे युवा महिला जासूस हैं। उन्होंने छोटी उम्र में कई बड़े कारनामे करके जल्द ही नाम कमा लिया।
स्कूली में ‘खबरी’ बुलाते थे दोस्त
दिल्ली के शाहदरा में रहने वाली आकृति जब स्कूल में थी तब से उनके साथी उन्हें ‘खबरी’ कह कर बुलाते थे। चाहे किसी टीचर के बारे में कुछ पता लगाना हो या किसी दूसरी लड़की के जीवन में क्या चल रहा है जानना हो सब उन्हें ही याद करते। इससे भी मजेदार बात तो ये थी कि आकृति जो भी खबर लाती वह बेहद सटीक होती होती थी।
शौक ने बना दिया जासूस
खत्री, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘युवा संसद प्रतियोगिता’ की विजेता भी रह चुकी हैं। जब वह पूर्वी दिल्ली में केंद्रीय स्कूल में पढ़ती थी तब से जासूसी और जासूस का काम उन्हें हमेशा ही आकर्षित करता था। वह जानना चाहती थीं कि डिटेक्टिव आखिर काम कैसे करते हैं। इसी शौक ने आज उन्हें देश की सबसे युवा महिला डिटेक्टिव बना दिया।
पहला केस- प्री-मैरिटल की जांच का मिला जिम्मा
2006 में एक कंपनी में काम करते वक्त आकृति ने अखबार में जासूसी एजेंसी का एक ऐड देखा और अप्लाई कर दिया। आकृति ने अप्लाई करने के बाद एजेंसी में फोन किया और कहा कि वे उनके साथ काम करना चाहती हैं। एजेंसी ने भी उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया। उनके जासूसी के प्रति जुनून को देखते हुए काम पर रख लिया गया। एजेंसी के बॉस ने उन्हें एक प्री-मैरिटल केस की जांच का जिम्मा सौंपा। ये आकृति का पहला जासूसी केस था। जो वह एक एजेंसी के लिए कर रही थीं।
पहले ही केस से किया प्रभावित
कॉलेज गर्ल के तौर पर घर की तालश के बहाने मैंने लड़के के परिवार के बारे में पता करना शुरू किया। लड़का सीए था लेकिन, उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि बेहद विवादास्पद थी। उसके बड़े भाई की पत्नी उसे छोड़ चुकी था और उनके मोहल्ले में कोई भी उस परिवार को पसंद नहीं करता था। बस इतनी जानकारी जुटाने की ही देर थी। उन्होंने केस को सॉल्व कर दिया और सारी जानकारी निकाल कर अपने क्लाइंट को दी। उनके पहले ही काम से कंपनी बेहद प्रभावित हुई।
पेशे ने कराया सभ्य समाज के भीतर छुपे घिनौने चेहरे से रूबरू
काम को जुनून की तरह करने वाली आकृति सिंगल हैं और अपने परिवार के साथ शहादरा में रहती हैं। पंजाबी फैमिली में जन्मी आकृति के पिता सीपीडब्लूडी में कार्यरत हैं जबकि मां भारतीय रेल में काम करती हैं। आज उनकी खुद की डिटेक्टिव एजेंसी है। खुफिया कैमरे और अत्याधुनिक रिकॉर्डिंग उपकरण उनके हथियार हैं, जिससे वह अपराध और धोखेबाजों का पर्दाफाश करने में लगी हुई हैं। आकृति मानती हैं कि इस पेशे ने उन्हें सभ्य समाज के भीतर छिपे एक घिनौने चेहरे से रूबरू कराया है, जहां पर अपने ही अपनों को धोखा दे रहे हैं।
दिल्ली में 12 और भारत 50 लोग हैं टीम में शामिल
आकृति बताती हैं कि उन्हें अपने प्रोफेशन में मजा आ रहा है और उनकी इसे छोड़ने की कोई प्लानिंग नहीं है। आकृित के मुताबिक उनकी टीम पहले दिल्ली में ही काम करती थी, लेकिन धीरे-धीरे टीम बढ़ती गई। आज उनकी टीम में कुल 60-70 लोग काम करते हैं। जिसमें दिल्ली में 12 लोगों की टीम है और बाकी के लोग भारत के विभिन्न हिस्सों से कंपनी के लिए काम करते हैं। दिल्ली के प्रीत विहार में उनकी कंपनी का ऑफिस है।
जासूसी का पेसा कलंकित न हो, इसलिए बनाए अपने सिद्धांत
आकृति को कुछ ऐसे लोगों का भी सामना करना पड़ता है, जो जासूसी के पेशे का गलत तरीके से फायदा उठाना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांत बना रखे हैं ताकि जासूसी का पेशा किसी भी मायने में कलंकित न हो।
काम को देखकर लोगों को होती है हैरानी
आकृति कहती हैं कि आज वे दिन नहीं रहे जब महिलाओं को जासूसी करते देख लोग उपहास उड़ाया करते थे। अब तो लोग हमारे काम को देखकर हैरानगी जाहिर करते नजर आते हैं। आज हमारे पास हर तरह के केस आने लगे हैं, जिसे हमारी टीम पूरी शिद्दत से अंजाम तक पहुंचाती है।
ये सिर्फ जॉब नहीं बल्कि पैशन हैः आकृति
अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में आकृति का कहना है कि वो भी एक आम लड़की की तरह ही हैं। उन्हें भी पिज्जा खाना पसंद है। पार्टी और मूवी देखने को एंजॉय करती हैं। जहां तक शादी की बात है तो आकृति कहती हैं कि वो किसी से भी शादी करने को तैयार हैं बर्शते वो उन्हें वैसे ही अपनाए जैसी वो हैं। वो अपना प्रोफेशन नहीं छोड़ना चाहती। उनका कहना है कि ये सिर्फ एक जॉब नहीं है ये उनका पैशन है।
अपना इंस्टीट्यूट खोलना चाहती हैं आकृति
आकृति का कहना है कि वो अपना इंस्टीट्यूट या कोई भी ऐसा संस्थान खोलना चाहती हैं जिसमें वो लोगों को इस प्रोफेशन के बारे में बता सकें। वो कहती हैं कि उनकी मंशा इसके पीछे ये नहीं की लोग आकर उनके प्रोफेशन को ज्वाइन करें बल्कि, एक हॉबी क्लास के तौर पर इसे शुरू करना चाहिए। जिससे लोग इसकी बारिकियों को समझकर अपनी जिन्दगी के कड़वे अनुभवों को कम कर सकें। आकृति का कहना है ये तो सिर्फ शुरुआत है अभी बहुत आगे जाना है।