सीबीआई का शिकंजा कसते ही माया ने मोदी पर साधा निशाना!

Feb 22nd, 2014 | By | Category: आज के प्रमुख समाचार
लखनऊ/नई दिल्ली. आम चुनाव से पहले बसपा के लिए नई परेशानी खड़ी करते हुए सीबीआई, उत्तरप्रदेश के सात जिलों में मायावती के शासनकाल के दौरान मनरेगा के तहत प्रदान धन के कथित दुरुपयोग की जांच शीघ्र ही शुरू करेगी।सीबीआई जांच का आदेश आने के बाद मायावती मोदी पर हमलावर हो गई हैं। उन्होंने कहा कि वह बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को अगला प्रधानमंत्री नहीं बनने देंगी। वह मोदी से देश को बचाने के लिए हर संभव कोशिश करेंगी।
उन्होंने कहा कि मोदी देश की जनता को गुमराह कर रहे हैं। बसपा ने सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए यूपीए का हाथ थामा था। मोदी सांप्रदायिक ताकतों को बढ़ावा देते रहे हैं। इसीलिए बसपा मोदी को रोकने की पूरी कोशिश करेगी। गोधरा कांड का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक मोदी को लेकर बहुत घबराए हुए हैं, उन्हें पता है कि मुस्लिम मोदी के राज में कभी सुरक्षित नहीं रहे हैं।
उधर, सीबीआई सूत्रों ने बताया कि कथित वित्तीय अनियमितताओं और राज्य में साल 2007-10 के दौरान केंद्र प्रायोजित योजना के कार्यान्वयन में सत्ता के दुरुपयोग की जांच शुरू करने का फैसला किया गया है। यह फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ की ओर से सीबीआई को कथित दुरुपयोग और धन की घपलेबाजी के साथ-साथ सूबे के सात जिलों में मनरेगा योजना के तहत सत्ता के दुरुपयोग की जांच का निर्देश दिए जाने के बाद किया गया। आदेश न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह और न्यायमूर्ति अशोक पाल सिंह की पीठ ने सच्चिदानंद गुप्ता सच्चे की जनहित याचिका पर दिया था।
अदालत ने सीबीआई को साल 2007 और 2010 के बीच बलरामपुर, गोंडा, महोबा, सोनभद्र, संत कबीर नगर, मिर्जापुर और कुशीनगर में मनरेगा के तहत धन की अनियमितता और दुरुपयोग के साथ-साथ शक्ति के दुरुपयोग की जांच करने तथा कानून के अनुसार उचित कार्रवाई और मुकदमे का निर्देश दिया था।
इन जिलों पर रहेगी सीबीआई की विशेष नजर
सोनभद्र: जिस वक्त पनधारी यादव सोनभद्र के डीएम और महेंद्र सिंह सीडीओ थे करीब ढाई सौ करोड़ रुपये मनरेगा के तहत खर्च किए गए। विभिन्न जांच एजंसियों के मुताबिक सिंचाई के लिए फर्जी और अनुपयोगी चेक डैम बनवाए गए। घोरावल में एक ही तालाब तीन बार खुदवाया गया। 100 किलोमीटर अधिक दूरी पर स्थित फर्मों से निर्माण सामग्री की खरीद की गई। पनधारी यादव को ही इंगित करते हुए केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा था कि पंचम तल पर तैनात एक अफसर सीबीआई जांच की राह का रोड़ा बना हुआ है।
गोंडा: यहां मजदूरों के बच्चों के लिए एक करोड़ कि खिलौने, दो करोड़ के फावड़े और 50 लाख की पानी की टंकिया खरीदी गई थीं। ज्यादातर खरीद बिना टेंडर के की गई। यहां सबसे चर्चित आरोपी तत्कालीन सीडीओ राजबहादुर और अन्य अधिकारी दुर्गेश कुमार व जीपी गौतम रहे।
बलरामपुर: यहां सर्वाधिक चर्चित नाम तत्कालीन डीएम एसएन दुबे का है। यहां सात लाख रुपये की फर्स्ट एड किट, डेढ़ लाख के कैलेंडर, छह लाख की पानी की टंकी और 80 लाख के टेंट की खरीद दिखाई गई लेकिन जांच में यह सामान कहीं मिला ही नहीं।
महोबा: सीडीओ जयराम लाल वर्मा व डीएम विजय विश्वास पंत सर्वाधिक चर्चित नाम। यहां 51 लाख के टेंट खरीदे गए जो मौके पर नहीं मिले न अफसर उन फर्मों के नाम बता पाए जिनसे खरीद हुई। तोहमत 140 ग्राम सभाओं पर मढ़ दी गई जो झूठी पाई गई।
मिर्जापुर: तत्कालीन डीएम मधुकर द्विवेदी, रमाकांत शुक्ल, जसवंत सिंह, सीडीओ विजय प्रताप सिंह, भगेलू राम को ईओडब्लू की जांच में दोषी करार दिया गया है। यहां 4 करोड़ से अधिक राशि के सामानों की खरीद में मानकों का पालन नहीं किया गया।
संत कबीर नगर: यहां जिस जेई गंगा प्रसाद श्रीवास्तव की इस्टीमेट रिपोर्ट के आधार पर भुगतान दिखाए गए थे उसीने जांच एजंसियों को हलफनाम देकर किसी भी तरह का इस्टीमेट बनाने से इनकार कर दिया। विभिन्न कामों में जो ईंटे इस्तेमाल की गई वे स्थानीय बसपा विधायकों के या उनके रिश्तेदारों के ईंट भट्ठों से खरीदी गई थीं।
कुशीनगर: डीएम भुवनेश कुमार व सीडीओ केदारनाथ, कार्यवाहक सीडीओ बीपी मिश्र चर्चित रहे। यहां 60 लाख की लागत से खड्डा बाजार में रोहुआ पुल बनवाया गया जो दो महीने बाद गिर गया। मनरेगा के स्टेट लेवल मॉनिटर विनोद शंकर चौबे ने आपत्ति उठाई थी कि मनरेगा के पुलिया बनवाई जा सकती है बड़ा पुल नहीं। यह राजेश नाम के एक व्यक्ति को ही पचास लाख का चेक दिया गया, 75 लाख के फावड़े खरीदे गए और 20 लाख फर्स्ट एड किट में लगाए गए।

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